कौन हूं मैं ? who am I ? मेरी सोच ।

स्वागत है फिर एक बार मेरे ब्लॉग पर मैं आज फिर से कुछ कहना चाहता मेरे दिल की बातें शेयर करना चाहता हूं

मैं कौन हूं कहां से आया हूं कहां पर हूं क्या कर रहा हूं इस बातें हमेशा मेरे मन को सताती रहती है इसकी शुरुआत तो बचपन से हो गई थी बचपन में जब स्कूल में पढ़ाई करते थे तब हमारे मन में काफी प्रॉब्लम चलते थे लेकिन हमेशा ही लगता था कि इस बार स्कूल खत्म हो जाएगी सब प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी लेकिन मेरे दिल की बात आपको बताऊं तो ऐसा कुछ नहीं हुआ एक बार स्कूल खत्म हो गई बोर्ड में अच्छे मार्क्स आ गए डॉक्टरी के लिए कॉलेज में एडमिशन मिल गया लेकिन फिर भी सभी प्रॉब्लम खत्म नहीं हुए मुझको  जो शांति चाहिए थी वह नहीं मिली प्रॉब्लम्स फिर भी बढ़ने लगी पढ़ाई का टेंशन रहने खाने का टेंशन वह सब होता था तब हमें लगता था कि एक बार कॉलेज खत्म हो जाएगी तो सारी प्रॉब्लम्स भी खत्म हो जाएगी लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ जब कॉलेज से निकले बिजनेस में आए तो सेट होने के लिए प्रॉब्लम्स और भी बढ़ गई  सबसे ज्यादा दिक्कत पैसे कमाने में आती है और कमाएं पैसे अच्छी जगह यूज करना उससे भी बड़ी प्रॉब्लम रहती है । एक बार पैसे कमा लिए बिज़नेस अच्छे से चेक कर लिया कंपनी जोरों से चलने लगी पैसे अच्छे से कम आने लगे अच्छे से यूज करना भी सीख लिया लेकिन प्रॉब्लम खत्म नहीं  हो रही थी तब मुझे ऐसा लगता था मैं मेरी बात कर रहा हूं तो मुझे ऐसा लगता था कि एक बार शादी हो जाएगी कोई लाइफ पाटनर आ जाएगा अकेले नहीं रहना पड़ेगा तब सारी प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी यह बात भी  सही नहीं निकली ऐसा कुछ नहीं हुआ प्रॉब्लम से और भी बढ़ गए एक-दूसरे के स्वभाव के मैच करना बहुत मुश्किलें आती है तब मैंने सोचा कि कुछ तो गड़बड़ है इस वक्त सब कुछ ठीक हो जाना चाहिए था कुछ तो छूट रहा है परम शांति के लिए तो इस पर रिसर्च करना चालू किया तब पता चला की एक्चुअल में प्रॉब्लम की कुछ कुछ अलग ही है मैंने जाना कि जिसको हम मैं मानते हैं एक्चुअल में हम है ही नहीं हम कुछ और है हमारे अंदर दो चीजें हैं एक भौतिक यानी की फिजिकल और दूसरी परा भौतिक यानी कि नोन फिजिकल जिसे हम टच नहीं कर सकते  उसको आत्मा या स्पीरीट के नाम से जानते हैं लेकिन मैंने जब डीप में रिसर्च किया तब पता चला की एक्चुअल में जैसा हम सोचते हैं वैसा नहीं है कुछ और ही है इसके सलूशन के लिए जब मैंने रिसर्च किया तब मुझे एक रास्ता मिला ध्यान का  यानी कि मेडिटेशन यह तो सिर्फ एक रास्ता था मंजिल तो दूर थी लेकिन जब इसकी गहराई में गए तब कुछ कुछ एहसास होने लगे इस दुनिया से हम हमें अलग समझते हैं लेकिन असल में हम उससे जुड़े हैं बहुत गाढ संबंध से जुड़े हैं इसकी गहराई में नहीं पड़ते इसको सिर्फ अनुभव किया जा सकता है बोला या समझा नहीं जा सकता है हम साइंटिफिक भाषा में बात करें तो मेरे अनुभव के और पढ़ाई के मुताबिक हमारी करोड़ राजू मतलब स्पाइनल कॉर्ड के आसपास सात चक्र होते हैं और यह सातों चक्र तीन नाडिया से एक दूसरे से जुड़े होते हैं इस सातों चक्र मे पहला मूलाधार दूसरा स्वाधिष्ठान तीसरा मनीपुर चौथा अनाहत पांचवा विशुद्धि छठा आज्ञा चक्र सातवा सहस्रार के नाम से  जाने चाहते हैं सातों चक्र हो एक दूसरे से जुड़े होते हैं जो सातों चक्र हैं वह रियल में शक्ति के केंद्र है यानी कि सेंटर ऑफ एनर्जी वह सब एक दूसरे से शक्ति की आप ले करते हैं यही प्रॉब्लम है और हमारी जिंदगी चलती है।



Comments

comments